Saturday, 28 January 2017

Hamari Ishq Ki Dukaan Hai.
Dosto Ishq Le Jaaya Karo.
Kabi Roona Nahi Hardam Muskuraaya Karo.
Hum Lete Nahi Paise Ishq Ke Badle.
Bas Apna Sara Gam Hume De Jaaya Karo...♡♡

Tuesday, 1 November 2016

कहते हैं कि यमराज इतने व्यस्त रहते थे, कि कभी बहन यमुना के घर नहीं जा पाते थे। इस पर यमुना को बहुत दुःख होता था। एक बार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीय को यमराज अचानक यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना बहुत प्रसन्न हुईं और यमराज की खूब आवभगत की। यमराज ने प्रसन्न हो कर वर दिया कि आज के दिन बहन के घर भोजन करने वाले को यम का भय न होगा और उनकी आयु में वृद्धि होगी। इस परंपरा के माध्यम से हर भाई-बहन के बीच स्नेह बढे, इस प्रार्थना के साथ आप सबको भाई दूज पर्व की अनंत शुभकामनाएँ। साथ ही आप सब के लिए चित्रगुप्त पूजनोत्सव की मंगलकामना।

Friday, 14 October 2016

See the Natural Beauty...

A hindi Poem(Sapne pure kr chodunga..)

:::::::::सपने पूरे कर छोडूंगा:::::::::

न बोलूँगा न देखूंगा दुनिया से नाता तोडूंगा
न रुकना है न थकना है सपने पूरे कर छोडूंगा ,
मैं जान फूंक दूंगा अब तो अपना रास्ता न मोडूँगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।
टकराना है चट्टानों से भिड़ना है जा मैदानों में
जुड़ना है धरती से मुझे उड़ना है आसमानों में,
रोक सके जज़्बात मेरे अब दम है कहाँ तुफानो में
देर लगे चाहे मुझको राहों से मुख न मोडूँगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।
है सब्र का फल मीठा लेकिन है सब्र कहाँ इंसानों में
हो लक्ष्य न जिसका जीवन में रहता है यो श्मशानो में ,
मेरा दर्द क्या जानेगा कोई है कई राज छुपे मुस्कानों में
टकराऊंगा हर दीवार से मैं पर हाथ कभी न जोडूंगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।
जब तक पूरे हो न जाएँ है चैन कहाँ अरमानों को
लगे न फल जब पेड़ों में जाता है कौन बागानों को ,
मन में जब है ठान लिया रोकेगा कौन दीवानों को
रच के मैं इक पाठ नया पन्ना इतिहास में जोडूंगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।

Sweet memory of friends..

जिनसे बिछड़े हुए मुझको मुद्दत हुयी है,
याद सीने से उनकी लगा लेने दे|
रो रो कर थक चुका हूँ मैं यादों में उनकी,
मेरी हाल पे उनको मुस्कुरा लेने दे|
अरे आँख में लाख सपने सजाये हुए था,
उनको खाबों पर पहरा लगा लेने दे|
मैनें अंधेरे में जलाया था जो उन्स दीपक,
वो दीपक भी उनको बुझा लेने दे|
हमेशा से अँगूली वो मुझपे उठाते रहे हैं,
इल्जामों को अब सिर उठा लेने दे|
उनकी सुनाना तो आदत सदा से रही है,
फिर आज भी उनको सुना लेने दे|
अरे ये अक्सर रूठ जाते हैं रूठने वाले,
इस बार भी तू उनको मना लेने दे|
हकीकत आज कल में पता चल जायेगी,
अभी आईना तू उनको दिखा लेने दे|
मैं अपनी मर्जी का मालिक सदा से रहा,
"पर" खुद का मुझको जला लेने दे|
आसमां ओढ़कर तो एक दिन सो जाऊँगा,
अभी नींद से कुछ को जगा लेने दे|
अरे सब कुछ मिला उस खुदा से है मुझको,
झूठी तारिफों में अब मुस्कुरा लेने दे|
जिनसे बिछड़े हुए मुझको मुद्दत हुयी है,
याद सीने से उनकी लगा लेने दे||